Jiwashm Kise kahte hain?(What is Fossils?)

 दोस्तों , क्या आपने जीवाश्म(Fossils ) के बारे में सुना है या फिर जीवाश्म ईंधन के बारे में तो सुना होगा और यदि  नहीं सुना है तो आइये आज हम इसके बारे में विस्तार से जानेंगे कि जीवाश्म किसे कहते हैं ?
किसी भी जीवित प्राणी या पेड़ पौधे  का उसके मर जाने के बाद उसका जो अंश मिलता है उसे जीवाश्म कहा जाता है।
साधारणतः जब कोई भी  प्राणी की मौत हो जाती है तो उसके शरीर के मांस गल जाते हैं पर उसकी हड्डियां लम्बे समय तक नहीं गलती है और कई सदियों बाद तो वो पत्थर में परिणत हो जाती है इसे ही जीवाश्म कहा जाता है। जब कभी कहीं खुदाई होती है तो अक्सर सुनते है की कही पर जीवाश्म की प्राप्ति हुई है पेड़ पौधों के साथ भी यही होता है जब वे हज़ारो साल तक जमीं में दफ़न हो जाते हैं तो वे पत्थर में बदल जाते हैं।

जीवाश्म के प्रकार –

1. शारीरिक जीवाश्म –

आमतौर पर किसी भी शरीर के जीवाश्म वास्तविक जीवों के अवशेष हैं। आम तौर पर, केवल कठोर कंकाल (खोल या हड्डी) को संरक्षित किया जाता है, और नरम ऊतक (त्वचा, मांसपेशी, अंग, आदि) मृत्यु के बाद सड़ जाते हैं। कमजोर कंकाल वाले जानवरों (जैसे, एक झींगा या एक कीट) के संरक्षित होने की संभावना कम होती है और जिन जानवरों में पूरी तरह से कंकाल नहीं होता है, वे बहुत कम ही जीवाश्म होते हैं।

2. मोल्ड और कास्ट-

शरीर के जीवाश्मों में मोल्ड और कास्ट शामिल हैं। एक साँचा उस चट्टान पर खोल द्वारा छोड़ी गई छाप है जिसने इसे घेर लिया है। एक बाहरी साँचा खोल के बाहर का एक साँचा है। हर बार जब हम चट्टान से किसी खोल या हड्डी को तोड़ते हैं, तो एक बाहरी साँचा पीछे छूट जाता है। शैल के नीचे की ओर के सांचे चट्टान की सतह पर छोड़े जा सकते हैं जो तब बनते हैं जब रेत या मिट्टी खोल के अंदर भर जाती है। इन्हें आंतरिक मोल्ड कहा जाता है।

3. ट्रेस जीवाश्म-

ट्रेस जीवाश्म विभिन्न ट्रैक, ट्रेल्स और barrow हैं। वे कीड़े के बिल से लेकर डायनासोर के पैरों के निशान तक हैं। वे हमें इस बारे में जानकारी देते हैं कि जानवर ने जीवित रहते हुए क्या किया। उदाहरण के लिए, हम सीख सकते हैं कि जानवर कैसे चलते हैं या खिलाते हैं।

जीवाश्म ईंधन क्या है ?

पृथ्वी के भीतर करोडो वर्ष तक जीवाश्मों के दब जाने से उसमे उच्च तप एवं दाब  के कारण  वे ईंधन में बदल जाते हैं ये ईंधन ही जीवाश्म ईंधन कहलाते हैं। जीवाश्म ईंधन ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है जो कि समय के साथ ख़तम हो जायेगा। इनके जलने से बड़ी मात्रा में कार्बन और सल्फर उत्पन्न होते हैं जो कि पर्यावरण के लिए हानिकारक है।
दोस्तों , आशा है कि आपको इस पोस्ट के द्वारा अच्छी information मिली होगी ,और यदि हाँ तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।

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